31 August 2015

 साधना :-


अगर आप ये समझते हैं कि साधना सरल हो , शीघ्र फलित हो तो आप गलत हैं....साधा उसी 

को जाता है जो असाध्य हो | बस यूँ समझ लो कि आग का दरिया है और डूब के जाना है |


अगर लड़ने का जिगर है और धीरज के साथ जोश हो ...कुछ पाने का अहसास हो...दृढ इच्छा 

शक्ति के साथ जीतने की पाने की ....बदलने की चाह हो तो सब कुछ संभव है....असंभव कुछ 

भी नहीं......


ॐ नमः शिवाय .......




सिद्ध करने के लिए निःसंदेह बहुत ऊर्जा लगती है। आदरणीय श्री मुकेश सक्सेना भाई ने मुझे बहुत सहायता की। मैं अपने कुछ अनुभव आपसे बांटता हूँ :-१. साधना के लिए सबसे ज्यादा जरुरी है अनुशासन , उसके बिना सब असंभव नहीं।२. साधना के बाद अपने व्यवहार और दैनिक जीवन के परिवर्तन को नोट करते रहें।३. जाप करते समय , छींक, मूत्र का वेग , प्यास , शरीर के अंगों में दर्द होना अचानक ही ये बताता है कि आप सही राह में जा रहे हैं।
४. आपको साधना या जाप से विमुख करने बहुत से व्यवधान आएंगे , हो सकता है कि घर वालों की तरफ से ही आएं पर आप हटे नहीं।
५. कभी शरीर कमज़ोर पड़ना , सुबह देर से उठना बताता है कि आपकी राह गलत नहीं है।
६. वैदिक मन्त्रों का जाप बिना विनियोग के करने का कोई मतलब नहीं है।
७. अगर शीघ्र सफल होना चाहते हैं और बिना किसी को कष्ट दिए हुए कोई मंत्र सिद्ध करना चाहते हैं , तो केवल शाबर मंत्र ही आपका भला कर सकते हैं। वैदिक मन्त्रों नियम और सिद्ध करने की विधि बहुत कठिन है।
८ मन्त्रों की साधना या जाप करते हुए आपकी कमज़ोरी सामने आ सकती है , जैसे किसी रोग का उभरना , कहीं चोट लगना या असमय क्रोध आना। जो भी आपकी कमज़ोर नस हो वो दबाई जाती है , ताकि आप जाप करना छोड़ दो.
९. सबसे महत्त्वपूर्ण बात अगर आपने कोई जाप या साधना चालू की है तो बिना पूर्ण किये ना छोड़ें , क्योंकि मोक्ष , निदान और समस्या निर्वाण तभी संभव है अड़े रहें , डटे रहे। आपके पास खोने के लिए कुछ नहीं है पर पाने के लिए पूरा जहाँ है।
ओम नमः शिवाय।




शाबर आसन सिद्धि :-

शाबर आसन सिद्धि :-


सत नमो आदेश गुरूजी को आदेश ओम गुरूजी ओम सत्य की धरती 


सत्य का आकाश सत्य की माला सत्य का जाप सत्य का आसन सत्य


का पूत आसन बैठे गुरु योगी अवधूत आसन ब्रह्मा इन्द्र आसन ....


आसन बैठे गुरु गोविन्द आसन बैठे जपिए जाप कोटि जन्म के उन्त्रते 


पाप आसन बैठे सिंघासन बैठे,बैठे गिरी की छाया पांच तत्ले आसन पर 


बैठे सतगुरु ने सत्य का शब्द सुनाया बीना मंत्र आसन लगाये सो योगी


नरक जाये मंत्र पढ़ आसन सो योगी अमरापुर जाए श्रीनाथ जी गुरूजी 


को आदेश आदेश …



विधान :- आसन के सामने वज्रासन में बैठकर दोनों हाथ ऊपर उठाकर


 केवल १ बार मंत्र पढ़े , उसके बाद दाहिना पैर आसन पर रखकर आसन


 पर बैठे और जाप करें। ( वज्रासन मतलब आपको पैरो को मोड़कर 


 उस पर बैठना है , इसके लिए किसी गुरु आज्ञा की आवश्यकता नहीं ये
   

स्वयं ही सिद्ध है )पोस्ट के साथ जो फोटो है उस मुद्रा में बैठ कर


अपने दोनों हाथ ऊपर कर केवल १ बार जाप कर दाहिना पैर पहले रखें
  

और आसन ग्रहण करें I



1.पूजा-पाठ को सिद्ध कैसे किया जाए :-

जिस तरह मंत्रों में शक्ति बताई गई है उसी प्रकार विभिन्न प्रकार की मालाएं भी पूजा-अर्चना 

में सिद्धिदायक सिद्ध होती हैं। अभिमंत्रित मालाओं में तो अद्भुत आध्यात्मिक शक्ति आ जाती 

है, जिससे साधक को तुरंत सफलता मिलती है। माला के बिना मंत्र जप का पूर्ण फल नहीं मिल 

पाता है। देवी-देवताओं के जप के लिए काम में ली जाने वाली जप मालाओं का इस्तेमाल यदि 

तरीके से किया जाए तो नतीजे बेहतरीन मिलते हैं। माला का उचित प्रयोग करने से शीघ्र सिद्धि 

भी मिलती है। 


 कमलगट्टे की माला यह माला लक्ष्मी जी को अत्यंत प्रिय है। लक्ष्मी जी के मंत्रों

 का जप करने से शीघ्र सिद्धि मिलती है। यह माला धन प्राप्ति, स्थिर लक्ष्मी के लिए श्रेष्ठ है। 




लक्ष्मी मंत्र- ॐ श्री ह्रीं श्री कमले कमलालये प्रसीद श्री ह्रीं श्री ॐ महालक्ष्मै नम:॥ 

कुश ग्रंथि की माला कुश नामक घास की जड़ को खोदकर उसकी गांठों से बनाई गई यह कुश

 ग्रंथि माला सभी प्रकार के कायिक, वाचिक और मानसिक विकारों का शमन करके साधक को 

निष्कलुष,निर्मल और सतेज बनाती है। इसके प्रयोग से व्याधियों का नाश होता है। 

गणेश मंत्र- ॐ गं गणपत्यै नम:।



मूंगे की माला मूंगे की माला गणेश और लक्ष्मी की साधना में प्रयुक्त होती है। धन-संपत्ति, 

द्रव्य और स्वर्ण आदि की प्राप्ति की कामना के लिए की जाने वाली साधना मूंगे की माला को 

अत्यधिक प्रभावशाली माना गया है। मंगल ग्रह का जप भी इस माला से किया जाता है। मंगल 

मंत्र- ॐ अं अंगारकाय नम:। तुलसी की माला वैष्णव भक्तों तथा राम और कृष्ण की उपासना 

के लिए यह माला उत्तम मानी गई है। इस माला को धारण करने वाला पूर्ण शाकाहारी होना 

चाहिए। धारक का प्याज व लहसुन से भी पूरी तरह दूर रहने से सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। 

कृष्ण मंत्र- ॐ नमोभगवते वासुदेवाय:। ॐ कृष्णं शरणं गच्छामि:॥ 


स्फटिक माला स्फटिक माला सौम्य प्रभाव से युक्त होती है। इसके धारक को चंद्रमा, शुक्र व 

शिवजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इन देवताओं के जातक प्रिय होते हैं।

 मानसिक शांति, सात्विक और पुष्टि कार्यों की साधना के लिए यह माला उत्तम मानी जाती 

है। 


चंद्र मंत्र- ॐ सों सोमाय नम:। शुक्र मंत्र- ॐ शुं शुक्राय नम:। 


शंख माला शंख माला विशेष तांत्रिक प्रयोगों में प्रभावशाली रहती है। शिवजी की सााधना और

सात्विक कामनाओं की पूर्ति के लिए इसे धारण करना उत्तम माना जाता है। 

शिव मंत्र- ॐ नम: शिवाय:। रुद्र गायत्री- ॐ तत्पुरुषाय विधमहे महादेवाय धीमहि, तन्नो रुद्र:

प्रचोदयात्:। 


वैजयंती माला यह माला भगवान विष्णु की आराधना में प्रयुक्त होती है। श्रीविष्णु को वैजयंती 

बहुत प्रिय है। माना जाता है कि इसको धारण करने या जाप करने से भगवान प्रसन्न होते हैं 

और सदा आशीर्वाद रखते हैं। वैष्णव भक्त इसे सामान्य रूप में भी धारण कर सकते हैं। 

विष्णु मंत्र- ॐ नमो नारायण: 


हल्दी की माला हल्दी की यह माला गणेशजी को प्रसन्न करने के लिए काम में ली 

जाती है। गणेश पूजा में प्रयोग लाई जाने वाली इस माला का बृहस्पति ग्रह और देवी 

बगलामुखी की साधना में भी प्रयोग किया जाता है। गुरु मंत्र- ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौ गु: गुरवे नम:। 

पारद माला इसका दूसरा नाम त्रिलोक्य विजय माला है। इसके पहनने से दरिद्रता दूर होती है 

तथा शिव व शनि प्रसन्न होते हैं। आकस्मिक धनागमन होने की संभावना बढ़ती है। शरीर के 

समस्त रोग स्वत: ही धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। शनि की साढ़ेसाती दोष निवारण में भी यह 

राहत प्रदान करती है। 


मोती माला यह माला चंद्रमा की तथा आकर्षण व मानसिक शांति के लिए उपयुक्त है। इसे 

पहनने से स्त्रियों के सौंदर्य में वृद्धि व शीतलता का अनुभव होता है। 

चंद्र मंत्र- ॐ सों सोमाय नम:। चंदन की माला यह दो प्रकार की होती है- सफेद और लाल चंदन 

की। सफेद चंदन की माला का प्रयोग शांति पुष्टि कर्मों में तथा राम, विष्णु आदि देवताओं की

 उपासना व राहू ग्रह की शांति के लिए जप किया जाता है। जबकि लाल चंदन की माला 

गणेशोपासना तथा साधना (दुर्गा, लक्ष्मी, त्रिपुरसुंदरी) आदि की साधना के लिए प्रयुक्त होती 

है। लाल चंदन की माला से सूर्य का भी जप किया जाता है। धन- धान्य की प्राप्ति की साधना 

में भी इस माला का प्रयोग किया जाता है। 

राहू मंत्र- ॐ भ्रां भ्री भ्रौ रां: राहवे नम्:। सूर्य मंत्र- ॐ धृर्णि सूर्य आदित्य श्री ॐ। 


रोग विनाशक रुद्राक्ष माला रुद्राक्ष शिव को परम् प्रिय है। वैज्ञानिक तौर पर रुद्राक्ष में चुंबकीय, 

विद्युतीय और आकर्षण शक्तियां पाई जाती हैं। इसके स्पर्श एवं उपयोग से अनेक पापों से 

छुटकारा मिलता है। इससे दीर्घायु एवं स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। रुद्राक्ष के उपयोग से स्नायु 

रोग, स्त्री रोग, गले के रोग, रक्तचाप, मिरगी, दमा, नेत्र रोग, सिर दर्द आदि कई बीमारियों से 

लाभ होता है। श्रद्धा-भक्ति से धारण किया गया रुद्राक्ष सम्पूर्ण कामनाओं को सिद्ध करता है। 

रुद्राक्ष सामान्यत: एक से इक्कीस मुख तक पाए जाते हैं परन्तु पंद्रह से इक्कीस मुख रुद्राक्ष

 प्राय: दुर्लभ होते हैं। एक मुखी रुद्राक्ष साक्षात भगवान शंकर का स्वरूप है। यह अत्यंत दुर्लभ है

 व कई कार्यों में सफलता देता है।

27 August 2015

POOJAN METHODS :-

' शिवाभिषेक '

" रुतम् दु:खम्, द्रावयति नाशयतीतिरुद्र: "



अर्थात भोलेनाथ सभी दु:खों को नष्ट कर देते हैं।



हमारे धर्मग्रंथों के अनुसार हमारे द्वारा किए गए पाप ही हमारे दु:खों के कारण हैं। रुद्रार्चन 

और रुद्राभिषेक से हमारे समस्त पाप कर्म भी जलकर भस्म हो जाते हैं और साधक में शिवत्व 

का उदय होता है तथा भगवान शिव का शुभाशीर्वाद भक्त को प्राप्त होता है व उनके सभी 

मनोरथ पूर्ण होते हैं।इस पृथ्वी पर शिवलिंग को शिव का साक्षात स्वरूप माना जाता है तभी तो 

शिवलिंग के दर्शन को स्वयं महादेव का दर्शन माना जाता है।


मान्यता है कि एकमात्र सदाशिव रुद्र के पूजन से सभी देवताओं की पूजा स्वत: हो जाती है।

रूद्रहृदयोपनिषद में शिव के बारे में कहा गया है 


                            " सर्वदेवात्मको रुद्र: सर्वे देवा: शिवात्मका: "


अर्थात् सभी देवताओं की आत्मा में रूद्र उपस्थित हैं और सभी देवता रूद्र की आत्मा हैं।


हमारे शास्त्रों में विविध कामनाओं की पूर्ति के लिए रुद्राभिषेक के पूजन के निमित्त अनेक 

द्रव्यों तथा पूजन सामग्री को बताया गया है। विशेष मनोरथ की पूर्ति के लिये तदनुसार पूजन 

सामग्री तथा विधि से रुद्राभिषेक किया जाता है।रुद्राभिषेक के विभिन्न पूजन के लाभ इस 

प्रकार हैं-


• जल से अभिषेक करने पर वर्षा होती है।


• असाध्य रोगों को शांत करने के लिए कुशोदक से रुद्राभिषेक करें।


• भवन-वाहन के लिए दही से रुद्राभिषेक करें।


• लक्ष्मी प्राप्ति के लिये गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करें।


• धन-वृद्धि के लिए शहद एवं घी से अभिषेक करें।


• तीर्थ के जल से अभिषेक करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।


• इत्र मिले जल से अभिषेक करने से बीमारी नष्ट होती है ।


• पुत्र प्राप्ति के लिए दुग्ध से और यदि संतान उत्पन्न होकर मृत पैदा हो तो गोदुग्ध से 

   रुद्राभिषेक करें।


• रुद्राभिषेक से योग्य तथा विद्वान संतान की प्राप्ति होती है।


• ज्वर की शांति हेतु शीतल जल / गंगाजल से रुद्राभिषेक करें।


• सहस्रनाम-मंत्रों का उच्चारण करते हुए घृत की धारा से रुद्राभिषेक करने पर वंश का विस्तार 

  होता है।


• प्रमेह रोग की शांति भी दुग्धाभिषेक से हो जाती है।


• शक्कर मिले दूध से अभिषेक करने पर जडबुद्धि वाला भी विद्वान हो जाता है।


• सरसों के तेल से अभिषेक करने पर शत्रु पराजित होता है।


• शहद के द्वारा अभिषेक करने पर यक्ष्मा (तपेदिक) दूर हो जाती है।


• पातकों को नष्ट करने की कामना होने पर भी शहद से रुद्राभिषेक करें।


• गो दुग्ध से तथा शुद्ध घी द्वारा अभिषेक करने से आरोग्यता प्राप्त होती है।


• पुत्र की कामनावाले व्यक्ति शक्कर मिश्रित जल से अभिषेक करें।




शिव आराधना मे अभिषेक को महत्वपूर्ण को माना जाता है,क्योंकि जल की धारा भगवान

शिव को अत्यंत प्रिय है और उसी से हुई है रूद्रभिषेक की उत्पत्ति।रूद्र यानी भगवान शिव 

और अभिषेक का अर्थ होता है स्नान करना।भोलनाथ तो भाव के भूखे हैं , वह जल के स्पर्श 

मात्र से प्रसन्न हो जाते हैं.साधारण रूप से भगवान शिव का अभिषेक जल या गंगाजल से

होता है परंतु विशेष अवसर व विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए दूध, दही, घी, शहद, चने

की दाल, सरसों तेल, काले तिल, आदि कई सामग्रियों से महादेव के अभिषेक की विधि 

प्रचलित है।


- किसी पुराने या निर्जन स्थान पर स्थापित शिवलिंग की नियमित रूप से साफ सफाई , पूजा 

  और अभिषेक , बहुत ही उत्तम फल देता है। 


   -यदि पारद के शिवलिंग का अभिषेक किया जाय तो बहुत ही शीघ्र चमत्कारिक शुभपरिणाम     मिलता है।


- जल से अभिषेकहर तरह के दुखों से छुटकारा पाने के लिए भगवान शिव का जल से अभिषेक 

करें,भगवान शिव के बाल स्वरूप का मानसिक ध्यान करें I ताम्बे के पात्र में ' शुद्ध जल ' भर 

कर पात्र पर कुमकुम का तिलक करें , ॐ इन्द्राय नम: का जाप करते हुए पात्र पर मौली बाधे,'

ॐ नम: शिवाय ' का जप करते हुए फूलों की कुछ पंखुडियां अर्पित करें I शिवलिंग पर जल की

 पतली धार बनाते हुए रुद्राभिषेक करें,अभिषेक करेत हुए   ॐ तं त्रिलोकीनाथाय स्वाहा  मंत्र 

का जप करेंI शिवलिंग को वस्त्र से अच्छी तरह से पोंछ कर साफ करें।


- दूध से अभिषेक


शिव को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद पाने के लिए दूध से अभिषेक करेंभगवान शिव के ' 

प्रकाशमय ' स्वरूप का मानसिक ध्यान करेंचाँदी के पात्र मे ' दूध ' भर कर पात्र को चारों और 

से कुमकुम का तिलक करें' ॐ श्री कामधेनवे नम: ' का जप करते हुए पात्र पर मौली बाधें  

' ॐ नम: शिवाय ' का जप करते हुए फूलों की कुछ पंखुडियां अर्पित करेंशिवलिंग पर दूध की

पतली धार बनाते हुए अभिषेक करेंअभिषेक करते हुए ' ॐ सकल लोकैक गुरुर्वै नम: ' मंत्र का

जप करेंशिवलिंग को साफ जल से धो कर वस्त्र से अच्छी तरह से पोंछ कर साफ करें।


- ऋतु फलों के रस से अभिषेक

अखंड धन लाभ व हर प्रकार के कर्ज से मुक्ति के लिए भगवान शिव का फलों के रस से

 अभिषेक करेंI

भगवान शिव के ' नील कंठ ' स्वरूप का मानसिक ध्यान करेंचाँदी या ताँबे के पात्र मे गन्ने का

या जो भी ऋतुफल हो उसका रस भर कर पात्र को चारों और से कुमकुम का तिलक करें i 

' ॐ कुबेराय नम: ' का जाप करते हुए पात्र पर मौली बाधें ' ॐ नम: शिवाय ' का जप करते

हुए फूलों की कुछ पंखुडियां अर्पित करेंशिवलिंग पर फलों का रस की पतली धार बनाते

हुएअभिषेक करें अभिषेक करते हुए ' ॐ ह्रुं नीलकंठाय स्वाहा ' मंत्र का जप करें I शिवलिंग पर

 स्वच्छ जल से भी अभिषेक करें व शिवलिंग को पोंछ दें।


- सरसों के तेल से अभिषेक

ग्रहबाधा नाश हेतु भगवान शिव का सरसों के तेल से अभिषेक करें I भगवान शिव के 

' प्रलयंकर ' स्वरुप का मानसिक ध्यान करें I ताम्बे के पात्र में ' सरसों का तेल ' भर कर पात्र 

को चारों और से कुमकुम का तिलक करें ' ॐ भं भैरवाय नम: ' का जप करते हुए पात्र पर 

मौली बाधें  I ' ॐ नम: शिवाय ' का जप करते हुए फूलों की कुछ पंखुडियां अर्पित करें I  

शिवलिंग पर सरसों के तेल की पतली धार बनाते हुए अभिषेक करें अभिषेक करते हुए 

' ॐ नाथ नाथाय नाथाय स्वाहा ' मंत्र का जप करें I




शिवलिंग को साफ जल से धो कर वस्त्र से अच्छी तरह से पोंछ कर साफ करें।


- चने की दाल

किसी भी शुभ कार्य के आरंभ होने व कार्य में उन्नति के लिए भगवान शिव का चने की दाल से

 अभिषेक करेंभगवान शिव के ' समाधी स्थित ' स्वरुप का मानसिक ध्यान करेंताम्बे के पात्र

 में ' चने की दाल ' भर कर पात्र को चारों और से कुमकुम का तिलक करें' ॐ यक्षनाथाय नम: ' 

का जप करते हुए पात्र पर मौली बाधें ' ॐ नम: शिवाय ' का जाप करते हुए फूलों की कुछ 

पंखुडियां अर्पित करेंशिवलिंग पर चने की दाल की धार बनाते हुये अभिषेक करें अभिषेक करते

 हुये ' ॐ शं शम्भवाय नम: ' मंत्र का जप करेंशिवलिंग को साफ जल से धो कर वस्त्र से अच्छी

 तरह से पोंछ कर साफ करें।



- काले तिल से अभिषेक

तंत्र बाधा नाश हेतु व बुरी नजर से बचाव के लिए काले तिल से अभिषेक करेंभगवान शिव के

 ' नीलवर्ण ' स्वरुप का मानसिक ध्यान करेंताम्बे के पात्र में ' काले तिल ' भर कर पात्र को 

चारों और से कुमकुम का तिलक करें ' ॐ हुं कालेश्वराय नम: ' का जप करते हुए पात्र पर 

मौली बाधें' ॐ नम: शिवाय 'का जप करते हुए फूलों की कुछ पंखुडियां अर्पित करेंशिवलिंग पर

 काले तिल की धार बनाते हुए अभिषेक करें अभिषेक करते हुए ' ॐ क्षौं ह्रौं हुं शिवाय नम: '

का जप करेंशिवलिंग को साफ जल से धो कर वस्त्र से अच्छी तरह से पोंछ कर साफ करें।


- शहद मिश्रित गंगा जल

संतान प्राप्ति व पारिवारिक सुख-शांति हेतु शहद मिश्रित गंगा जल से अभिषेक करें भगवान 

शिव के ' चंद्रमौलेश्वर ' स्वरुप का मानसिक ध्यान करेंताम्बे के पात्र में शहद मिश्रित गंगा 

जल भर कर पात्र को चारों और से कुमकुम का तिलक करें' ॐ श्रां श्रीं श्रों सः चन्द्रमसे नम: '

 का जप करते हुए पात्र पर मौली बाधें' ॐ नम: शिवाय ' का जप करते हुए फूलों की कुछ 

पंखुडियां अर्पित करेंशिवलिंग पर शहद मिश्रित गंगा जल की पतली धार बनाते हुए अभिषेक

 करें अभिषेक करते हुए ' ॐ वं चन्द्रमौलेश्वराय स्वाहा ' का जप करेंशिवलिंग पर स्वच्छ जल 

से भी अभिषेक करें।


- घी व शहद

रोगों के नाश व लम्बी आयु के लिए घी व शहद से अभिषेक करेंभगवान शिव के ' त्रयम्बक '

 स्वरुप का मानसिक ध्यान करेंताम्बे के पात्र में ' घी व शहद ' भर कर पात्र को चारों और से 

कुमकुम का तिलक करें' ॐ धन्वन्तरयै नम:' का जप करते हुए पात्र पर मौली बाधें' ॐ नम:

 शिवाय ' का जप करते हुए फूलों की कुछ पंखुडियां अर्पित करेंशिवलिंग पर घी व शहद की 

पतली धार बनाते हुए अभिषेक करें अभिषेक करते हुए ' ॐ ह्रौं जूं स: त्रयम्बकाय स्वाहा ' का 

जप करेंशिवलिंग पर स्वच्छ जल से भी अभिषेक करें और पोंछ दें।


- केसर से अभिषेक

शास्त्रों के अनुसार पूर्ण वर्ष मे केवल महाशिवरात्रि के दिन ही शिवलिंग पर कुमकुम लगाया 

जा सकता है क्योंकि इस दिन शिव का विवाह हुआ था। इस दिन के बाद भगवान को कुमकुम

 नहीं लगाया जाता है। पूरे वर्ष शिवलिंग पर चंदन ही लगाया जाता है।आकर्षक व्यक्तित्व का 

प्राप्ति हेतु भगवान शिव का केसर से अभिषेक करेंभगवान शिव के 'नीलकंठ' स्वरूप का 

मानसिक ध्यान करेंताम्बे के पात्र मे केसर और पंचामृत भर कर पात्र को चारों और से कुमकुम

 कातिलक करें ' ॐ उमायै नम: ' का जप करते हुए पात्र पर मौली बाधें' ॐ नम: शिवाय ' का

 जप करते हुए फूलों की कुछ पंखुडियां अर्पित करेंपंचाक्षरी मंत्र पढ़ते हुए पात्र में फूलों की कुछ

 पंखुडियां दाल देंफिर शिवलिंग पर पतली धार बनाते हुए अभिषेक करें अभिषेक करते हुये 

'ॐ ह्रौं ह्रौं ह्रौं नीलकंठाय स्वाहा ' का जप करें शिवलिंग पर स्वच्छ जल से भी अभिषेक करें व 

पोंछ दें।


!! ॐ नमः शिवाय !!

ऋणहर्ता गणपति स्तोत्र

कर्ज, ऋण मोचन हेतु ऋणहर्ता गणपति स्तोत्र पाठ के लाभ

जब किसी जातक पर ऋण अर्थात कर्ज की स्थिति बहुत अधिक बढ़ जाये तब किसी शुभ तिथि से महागणपति जी के समक्ष ऋणहर्ता गणपति स्तोत्र का नियमित अपनी श्रद्धा अनुसार 3, 5, 8, 9 , अथवा 11 पाठ 45 दिन नित्य करे | किसी भी प्रकार के कर्ज, ऋण व आर्थिक बाधा से निश्चित मुक्ति मिलेगी | इस पाठ को करने से पूर्व हरे, केसरिया अथवा लाल वस्त्र बिछाकर श्री गणेश जी को स्थापित करे, जैसे हनुमान जी को सिंदूर व चमेली के तेल का चोला अर्पित करते है ठीक उसी प्रकार सिंदूर व चमेली के तेल का चोला श्री गजानन को अर्पित कर अपने बाये हाथ की तरफ देसी घी का दीपक व दाहिने हाथ की तरफ सरसे के तेल या तिल के तेल का दीपक स्थापित करे साथ ही विनायक जी को गुड चने व बेसन का कुछ भोग अवश्य लगाये |





ऋणहर्ता गणपति स्तोत्र:-


ध्यान:-


ॐ सिन्दूर-वर्णं द्वि-भुजं गणेशं लम्बोदरं पद्म-दले निविष्टम्।
ब्रह्मादि-देवैः परि-सेव्यमानं सिद्धैर्युतं तं प्रणामि देवम्।।

।।मूल-पाठ।।
सृष्ट्यादौ ब्रह्मणा सम्यक् पूजितः फल-सिद्धये।
सदैव पार्वती-पुत्रः ऋण-नाशं करोतु मे।।१

त्रिपुरस्य वधात् पूर्वं शम्भुना सम्यगर्चितः।
सदैव पार्वती-पुत्रः ऋण-नाशं करोतु मे।।२

हिरण्य-कश्यप्वादीनां वधार्थे विष्णुनार्चितः।
सदैव पार्वती-पुत्रः ऋण-नाशं करोतु मे।।३

महिषस्य वधे देव्या गण-नाथः प्रपुजितः।
सदैव पार्वती-पुत्रः ऋण-नाशं करोतु मे।।४

तारकस्य वधात् पूर्वं कुमारेण प्रपूजितः।
सदैव पार्वती-पुत्रः ऋण-नाशं करोतु मे।।५

भास्करेण गणेशो हि पूजितश्छवि-सिद्धये।
सदैव पार्वती-पुत्रः ऋण-नाशं करोतु मे।।६

शशिना कान्ति-वृद्धयर्थं पूजितो गण-नायकः।
सदैव पार्वती-पुत्रः ऋण-नाशं करोतु मे।।७

पालनाय च तपसां विश्वामित्रेण पूजितः।
सदैव पार्वती-पुत्रः ऋण-नाशं करोतु मे।।८

इदं त्वृण-हर-स्तोत्रं तीव्र-दारिद्र्य-नाशनं,
एक-वारं पठेन्नित्यं वर्षमेकं सामहितः।
दारिद्र्यं दारुणं त्यक्त्वा कुबेर-समतां व्रजेत्।।

26 August 2015

वास्तु -शास्त्र की सहायता से आर्थिक संपन्नता

धन हानि होने पर या नष्ट हुआ धन -समृद्धि वापस पाने के कुछ वास्तु उपाय :-




वास्तु -शास्त्र का ज्ञान होने से आप अपनी परेशानियों को , कष्टों को ना केवल कम ही कर सकते हैं वरन नष्ट हुए धन को फिर से पा सकते हैं।  ये उपाय मैंने कई जगह से एकत्रित किये हैं , जो  लिए बहुत उपयोगी हैं। 

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 १. अपने घर के दक्षिण -पश्चिम क्षेत्र में नंदी महाराज धातु का रखें। 





२. घर के पश्चिमी क्षेत्र में शतरंज या चेस बोर्ड रखें। 




३. घर के पूर्व -दक्षिण के पूर्व भाग में मतलब पूर्व-दक्षिण-पूर्व भाग में नाचती हुई डॉल्फ़िन मछलियों की मूर्ती रखें या चित्र।





४. घर की उत्तरी दिशा में एक पिरामिड रखें। 



५. अपने घर के उत्तर -पूर्व भाग के पूर्वी भाग में एक तलवार लटकाएं। 




६. घर के पश्चिमी क्षेत्र में ऊंट ( कैमल ) रखें जिसका मुख आपके घर के सेंटर मतलब केंद्र की तरफ हो। 




७. एक जोड़ा लाल घोड़ों का (धातु या सजावट के काम आता है जो )लेकर उसे अपने घर के दक्षिण -पूर्व क्षेत्र में रखें।




इन सभी उपायों को साथ में करना है , इससे कुछ हफ़्तों में आपकी परिस्थिति  लगेंगी और रुका हुआ या गया हुआ धन  मिलने लगेगा।