1 September 2015

माला की प्रतिष्ठा


(आदरणीय श्री मुकेश सक्सेना भाई जी की सहायता से )


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ॐ जप माला की प्रतिष्ठा ॐ

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माला का जप से बहुत बडा समबन्ध है जिसका हर तरह की पुजा मे सदियों से प्रयोग होता आ रहा है।।


पीपल के नौ पत्ते लाकर एक को बीच में और आठ को अगल-बगल इस ढंग से रके कि वह अष्ट-दल कमल-सा मालूम हो । 


बीचवाले पत्ते पर माला रखे और " ॐ अं आं इं ईं उं ऊं ऋं ॠं लृं ॡं एं ऐं ओं औं अं अः कं खं गं घं ङं चं छं जं झं ञं टं ठं डं ढं णं तं थं दं धं नं पं फं बं भं मं यं रं लं वं शं षं सं हं ळं क्षं " का उच्चारण करके पञ्च-गव्य के द्वारा उसका प्रक्षालन करे और फिर ‘सद्योजात’ मन्त्र पढ़कर गंगाजल या जल से उसको धो दें।



☆ सद्योजात-मन्त्र ~


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ॐ सद्योजातं प्रपद्यामि सद्योजाताय वै नमो नमः ।


भवे भवे नातिभवे भवस्व मां भवोद्भवाय नमः ।


इसके पश्चात् वामदेव-मन्त्र से चन्दन, अगर, गन्ध आदि के द्वारा 


घर्षण करे ।


☆ वामदेव-मन्त्र ~


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“ॐ वामदेवाय नमो ज्येष्ठाय नमः श्रेष्ठाय नमो रुद्राय नमः,

कालाय नमः, कल-विकरणाय नमो बलाय नमो बल-प्रमथनाय नमः

सर्व-भूत-दमनाय नमो मनोन्मनाय नमः ।”



तत्पश्चात् ‘अघोर-मन्त्र’ से धूप-दान करे~~

☆ अघोर-मन्त्र ~


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‘ॐ अघोरेभ्योऽथ-घोरेभ्यो घोर-घोरतरेभ्यः ।


सर्वेभ्यः सर्वशर्वेभ्यो नमस्तेऽअस्तु रुद्ररुपेभ्यः ।’


तदनन्तर ‘तत्-पुरुष-मन्त्र’ से लेपन करे ~~


☆ तत्-पुरुष-मन्त्र ~


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“ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महा-देवाय धीमहि । तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ।”


इसके पश्चात् एक-एक दाने पर एक-एक बार या सौ-सौ बार 


‘ईशान-मन्त्र’ का जप करना चाहिये~~




☆ ईशान-मन्त्र ~


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‘ॐ ईशानः सर्वविद्यानामीश्वरः सर्वभूतानां


ब्रह्माधिपतिर्ब्रह्मणोऽधिपतिर्ब्रह्मा शिवो मे अस्तु सदा शिवोम् ।’


फिर माला में अपने इष्ट-देवता की प्राण-प्रतिष्ठा करें । तदनन्तर इष्ट-


मन्त्र से सविधि पूजा करके प्रार्थना करनी चाहिये I


‘माले माले महा-माले सर्वतत्त्वस्वरुपिणि ।


चतुर्वर्गस्त्वयि न्यस्तस्तस्मान्मे सिद्धिदा भव ।।’



यदि माला में शक्ति की प्रतिष्ठा की हो तो इस प्रार्थना के पहले ‘ह्रीं’ जोड़


 लेना चाहिये और रक्तवर्ण के पुष्प से पूजा करनी चाहिये ।


वैष्णवों के लिये माला-पूजा का मन्त्र है –


‘ॐ ऐं श्रीं अक्षमालायै नमः ।’



अ-कारादि-क्ष-कारान्त प्रत्येक वर्ण से पृथक्-पृथक् पुटित करके अपने 


इष्ट-मन्त्र का १०८ बार जप करना चाहिये । इसके पश्चात् १०८ आहुति 


हवन करे अथवा २१६ बार इष्ट-मन्त्र का जप कर ले । उस माला पर दूसरे 


मन्त्र का जप न करे । प्रार्थना करें ~


ॐ त्वं माले सर्वदेवानां सर्व-सिद्धि-प्रदा मता ।


तेन सत्येन मे सिद्धिं देहि मातर्नमोऽस्तु ते ।।’


इस प्रकार आपकी माला अब जप करने योग्य हो गई। अंगुष्ठ और 


मध्यमा के द्वारा जप करना चाहिये और तर्जनी से माला का कभी स्पर्श 


नहीं करना चाहिये। माला को गुप्त रखना चाहिये। जप के लिए गौमुखी 


अवश्य प्रयोग करनी चाहिए अन्यथा कपडा ढककर ही जप करना 


चाहिए।।



31 August 2015

 साधना :-


अगर आप ये समझते हैं कि साधना सरल हो , शीघ्र फलित हो तो आप गलत हैं....साधा उसी 

को जाता है जो असाध्य हो | बस यूँ समझ लो कि आग का दरिया है और डूब के जाना है |


अगर लड़ने का जिगर है और धीरज के साथ जोश हो ...कुछ पाने का अहसास हो...दृढ इच्छा 

शक्ति के साथ जीतने की पाने की ....बदलने की चाह हो तो सब कुछ संभव है....असंभव कुछ 

भी नहीं......


ॐ नमः शिवाय .......




सिद्ध करने के लिए निःसंदेह बहुत ऊर्जा लगती है। आदरणीय श्री मुकेश सक्सेना भाई ने मुझे बहुत सहायता की। मैं अपने कुछ अनुभव आपसे बांटता हूँ :-१. साधना के लिए सबसे ज्यादा जरुरी है अनुशासन , उसके बिना सब असंभव नहीं।२. साधना के बाद अपने व्यवहार और दैनिक जीवन के परिवर्तन को नोट करते रहें।३. जाप करते समय , छींक, मूत्र का वेग , प्यास , शरीर के अंगों में दर्द होना अचानक ही ये बताता है कि आप सही राह में जा रहे हैं।
४. आपको साधना या जाप से विमुख करने बहुत से व्यवधान आएंगे , हो सकता है कि घर वालों की तरफ से ही आएं पर आप हटे नहीं।
५. कभी शरीर कमज़ोर पड़ना , सुबह देर से उठना बताता है कि आपकी राह गलत नहीं है।
६. वैदिक मन्त्रों का जाप बिना विनियोग के करने का कोई मतलब नहीं है।
७. अगर शीघ्र सफल होना चाहते हैं और बिना किसी को कष्ट दिए हुए कोई मंत्र सिद्ध करना चाहते हैं , तो केवल शाबर मंत्र ही आपका भला कर सकते हैं। वैदिक मन्त्रों नियम और सिद्ध करने की विधि बहुत कठिन है।
८ मन्त्रों की साधना या जाप करते हुए आपकी कमज़ोरी सामने आ सकती है , जैसे किसी रोग का उभरना , कहीं चोट लगना या असमय क्रोध आना। जो भी आपकी कमज़ोर नस हो वो दबाई जाती है , ताकि आप जाप करना छोड़ दो.
९. सबसे महत्त्वपूर्ण बात अगर आपने कोई जाप या साधना चालू की है तो बिना पूर्ण किये ना छोड़ें , क्योंकि मोक्ष , निदान और समस्या निर्वाण तभी संभव है अड़े रहें , डटे रहे। आपके पास खोने के लिए कुछ नहीं है पर पाने के लिए पूरा जहाँ है।
ओम नमः शिवाय।